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Monday, April 01, 2019

बवासीर का इलाज | Bawasir Ka Ilaj | Bawasir Ke Gharelu Nuskhe

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बवासीर का इलाज | Bawasir Ka Ilaj in hindi | Bawasir Ke Gharelu Nuskhe

बवासीर का इलाज (Bawasir Ka Ilaj) भी किया जा सकता है मैंने इससे पहले पाइल्स (हेमोर्रोइड्स ट्रीटमेंट) के लिए होम्योपैथिक मेडिसिन भी बताया है आप उस आर्टिकल को भी पढ़े अगर आप होमियोपैथी का ट्रीटमेंट चाहते हैं. लेकिन यदि आपको बवासीर (हेमोर्रोइड्स ट्रीटमेंट) की होम रेमेडीज चाहिए हैं तो इस आर्टिकल को ध्यान से पढ़े और इसमें से कोई भी नुस्खे को चुन कर बवासीर का इलाज करना शुरू कर दे.

आजकल फॉस्ट फूड बहुत अधिक प्रचलन में है। इसके सेवन से समय की बचत अवश्य होती है किंतु शरीर की पाचनक्रिया बिगड़ जाती है जो स्वयं में कई रोगों की उत्पत्ति का कारण बनती है, अतः रोगी को सर्वप्रथम अपने आहार-विहार में सुधार करना चाहिए।



बवासीर क्या होता है (Bawasir kya hota hai):


पहले तो आप ये बात समझ ले की ये कोई गुप्त रोग नहीं है पाइल्स किसी को भी हो सकता है. फिर बात अगर सेहत की है तो किसी से छुपाना नहीं चाहिए आखिर ये हमारी बॉडी है और बॉडी के किसी भी अंग में कोई भी बीमारी आ सकती है. इसलिए बिना किसी झिजक के हमें किसी भी रोग या समस्या के बारे में बात करनी चाहिए.

कब्ज़, पाइल्स के आने का मुख्य कारण होती है अगर आपको कब्ज़ का प्रॉब्लम है तो आप हमारे द्वारा दिए गए कब्ज़ के नुस्खों का प्रयोग करे. क्यों की अगर कब्ज़ की प्रॉब्लम लगातार बनी रहेगी तो बवासीर होने के चान्सेस बहुत ज्यादा हैं. कब्ज़ के कारण जब कोई शौच (शौच) के टाइम अगर तेज़ से ज़ोर लगता है तो ऐसे में स्टूल मस्सो में रगड़कर बाहर निकलता है. और मस्से छील जाते हैं जिससे मरीज़ को शौच के समय दर्द होता है. कभी कभी ज्यादा ज़ोर लगाने से मास्सा बहार भी आ जाता है. तब मरीज़ को बहुत दिक्कत होती है.


पाइल्स 3 टाइप्स के होते हैं

  1. अंदर का बवासीर 
  2. बाहर का बवासीर
  3. खूनी बवासीर

अंदर के बवासीर में दर्द ज्यादा होता है और बाहर के बवासीर में दर्द नहीं होता बस कभी कभी थोड़ा सा हल्का दर्द होता है जो की महसूस किया जा सकता है. अंदर के बवासीर में जब मल बार बार एक ही जगह से रगड़कर बाहर निकलता है तो उसमे खून आने लगता है. ऐसे में कभी कभी मरीज़ परेशांन हो जाता है.

बवासीर का कारण (Cause of piles in hindi):


बवासीर किसी भी किस्म की क्यों न हो, उसका सबसे बड़ा कारण पेट की खराबी ही होता है। जिन लोगों को कब्ज रहता है, उन्हें शर्तिया बवासीर की बीमारी से दो-चार होना पड़ता है। कब्ज की उत्पत्ति अनियमित भोजन करने, समय-असमय खाने, ऋतु के विरुद्ध भोजन एवं खाद्य-पदार्थ सेवन करने, अधिक मिर्च-मसाले और अधिक तले हुए चटपटे खाद्य-पदार्थ सेवन करने से, अम्लीय रसों की उत्पत्ति करने वाले खाद्य-पदार्थ, अधिक मादक द्रव्यों का इस्तेमाल करने से व्यक्ति की पाचन-क्रिया विकृत हो जाती है। 

जिसके चलते सुबह समय पर शौच नहीं आ पाता और पेट में मल सड़ने लगता है जो धीरे-धीरे सूख जाता है, जिससे व्यक्ति के पेट में दर्द और अफारे की शिकायत उत्पन्न हो जाती है। रोगी जैसे-जैसे मल त्यागकर राहत पाना चाहता है। ऐसे में जब वह अधिक जोर लगाकर मल त्यागने की चेष्टा करता है तो इससे गुदाद्वार की कोमल श्लैष्मिक त्वचा छिल जाती है और वहां जख्म बन जाता है। 

लम्बे समय तक कब्ज़ बनी रहने के कारण वही जखम मस्सों में परिवर्तित हो जाते हैं और मल त्यागते सममल विसर्जन के बाद भीतर चले जाते हैं लेकिन कुछ दिनों के बाद ये मलद्वार के बाहर ही स्थाई रूप से स्थिर हो जाते हैं। यह मस्से जब सूज जाते हैं तो इनमें जलन होने लगती है और रोगी बैठने-उठने, यात्रादि करने में भी कष्ट महसूस करता है। यदि कब्ज का इलाज नहीं किया जाए तो इन मस्सों से रक्तस्राव होने लगता है और फिर यही रोग खूनी बवासीर का रूप धारण कर लेता है।


बवासीर के लक्षण (Symptoms of piles in hindi):


अगर किसी को पाइल्स की शिकायत है या होने वाली है तो आप ऐसे पहचान सकते हैं. या यूँ कहा जा सकता है की अगर आपको नीचे दिए गए लक्षण दिखाई देते हैं तो आप समझिये की आपको बवासीर है या हो सकता है.

  1. हाज़मा ख़राब रहता है
  2. भूख नहीं लगती है
  3. कब्ज़ की शिकायत रहती है
  4. ज्यादातर पेट में गैस का प्रॉब्लम रहता है
  5. शरीर में कमजोरी रहती है
  6. चहरे में सूजन रहती है
  7. रोगी की आंखों के सामने अंधेरा छाने लगता है
  8. सिर चकराता है
  9. दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है
  10. रोगी का शरीर पसीने से भीग जाता है।

इसके अलावा और भी लक्षण हो सकते है. जो की मरीज़ को देखकर बताये जा सकते हैं. लेकिन अगर आपको इनमे से कोई भी लक्षण दिखाई देता है तो आप अपने पेट के लिए सावधान हो जाये. कब्ज़ का प्रॉब्लम है तो उसे ज़रूर सही कर ले.

बवासीर का इलाज (Bawasir Ka Ilaj)


जितनी भी पुरानी बवासीर क्यों न हो, उसका कारण कब्ज को ही माना गया है अतः कब्ज को नष्ट किए बिना बवासीर को नष्ट करने की कल्पना भी नहीं की जा सकती। .. कब्ज को नष्ट करने में त्रिफला महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 
हल्दी से बवासीर का इलाज:
हल्दी को भी बवासीर का इलाज के लिए एक कारगर उपाय माना जाता है. हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेट्री यानी सूजन घटाने वाले गुण होते हैं। इसके साथ ही हल्दी एंटी-सेप्टिक होती है, जो कीटाणुओं को नष्ट करती है। वहीं हल्दी घाव भरने में भी सहायक होती है। पुराने समय से हल्दी को बवासीर का अचूक इलाज माना जाता है। यहां कुछ तरीके दिए हैं जिन्हें आजमाकर हल्दी से दर्दनाक बवासीर का इलाज किया जा सकता है।
  • हल्दी को पीसकर इसे वेसिलीन के साथ मिलकर मस्सों पर लगाये
  • हल्दी में एलोवेरा मिलाकर भी लगा सकते हैं
  • हल्दी के दूध का सेवन करने से भी लाभ मिलता है
  • हल्दी को गाय के देशी घी में मिलकर भी लगाया जा सकता है

त्रिफला से इलाज:
कब्ज़ को नष्ट करने के लिए 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण रात को सोते समय गुनगुने दूध या गुनगुने जल के साथ सेवन करना चाहिए। त्रिफले की यह विशेषता है कि यह अन्दर जमे हुए पुराने मल को खुरचकर एवं ढीला करके निकाल देता है। दो-तीन दिन रोज त्रिफला का प्रयोग करना चाहिए।

ईसबगोल से इलाज:


कब्ज को नष्ट करने में ईसबगोल भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ईसबगोल की 5 से 10 ग्राम की मात्रा लेकर रात्रि में सोते समय गर्म दूध के साथ कुछ दिन सेवन करने से कब्ज दूर होती है और बवासीर में बहुत लाभ होता है।


गुलकन्द से इलाज:

रात को सोते समय 10-15 ग्राम की मात्रा में गुलकन्दै हल्के गरम दूध के साथ सेवन करने से बवासीर में लाभ मिलता है। क्योंकि गुलकन्द भी कब्ज़ को नष्ट करने की कारगर औषधि है

रसोत से बवासीर का इलाज:

रसोत और अजवायन 75-75 ग्राम की मात्रा में लेकर दोनों को अलग-अलग कूट-पीसकर कपड़छन करके चूर्ण बना लें और किसी शीशी में भरकर रख लें। प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम पानी या मठ्ठ के साथ सेवन करें इससे बवासीर रोग से शीघ्र मुक्ति मिलती है।

अधिक रक्तस्त्राव होने की स्थिति में रसौत का 5-10 ग्राम चर्णा ताजे जल के साथ सेवन करने से तुरन्त ही खुन जाना बंद हो जाता है।


आंवले से इलाज:

रात्रि में 5 ग्राम आंवले का चूर्ण हल्के गरम पानी से सेवन करें इससे कब्ज दूर होती है और बवासीर में राहत मिलती है।

आम के पत्तों से बवासीर का इलाज:

आम के कोमल पत्तों को जल के साथ पीसकर छान लें और इस रस में पिसी हुई मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पिएं, इससे बवासीर में खून गिरना बंद हो जाता है।

हरड़ से बवासीर का इलाज:

हरड़ को कूट-पीसकर चूर्ण बना लें और 4-5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम गुड़ के साथ सेवन करें, उससे कब्ज दूर होगा और बवासीर में आराम मिलेगा।

नागकेसर से बवासीर का इलाज:

 नागकेसर को कूट-पीसकर बारीक चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 5 ग्राम की मात्रा में 10 ग्राम मक्खन और 5 ग्राम मिश्री (पिसी हुई) मिलाकर सेवन करने से खूनी बवासीर में खून आना बंद होता है और रोगी को राहत महसूस होती है। नागकेसर का 5 ग्राम चूर्ण नाशपाती के मुरब्बे के साथ सेवन करने से भी खून जाना बंद हो जाता है।

पुष्पराज से इलाज:

पुष्पराज भस्म 120 मिली ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम घी के साथ सेवन करने से बादी बवासीर में शीघ्र लाभ होता है। इससे जलन में भी राहत मिलती है।

पिप्पली से इलाज:

पिप्पली का 5 ग्राम चूर्ण मड़े के साथ प्रतिदिन सेवन करने से बवासीर रोग नष्ट होता है।


तुलसी से बवासीर का इलाज:

तुलसी के ताजे कोमल पत्तों को पीसकर मस्सों पर लेप करने से मस्से शीघ्र नष्ट होते हैं। * 15-15 ग्राम की मात्रा में नीम और पीपल की पत्तियां लेकर उन्हें बारीक पीस लें और मस्सों पर लगाएं। इससे मस्से शीघ्र नष्ट होते हैं।

फिटकरी से बवासीर का इलाज:

फिटकरी को पीसकर मक्खन में मिलाएं और इसे मस्सों पर लगाएं मस्से शीघ्र ही सूख जाएंगे।


केले से बवासीर का इलाज:

रोज सुबह खाली पेट एक कच्चे केले में एक चम्मच भीमसेन कपूर की डालकर उसका सेवन करने से बवासीर मात्र 3 दिन में जड़ से नष्ट हो जाती है। यह नुस्खा खूनी और बादी दोनों ही प्रकार की बवासीर को जड़ से खत्म करने के लिए उपयोगी है।


नारियल की जटा से बवासीर का इलाज:


नारियल की जटा यानि की नारियल के ऊपर लगा हुआ छिलका, इसे किसी चाकू से निकलकर जला ले, अब इस नारियल की जटा की भस्म तैयार कर ले

नारियल की जटा की भस्म तैयार हो जाने के बाद ये भी जान ले की इसे किस प्रकार से लेना है. इस जटा को ताज़े मट्ठे के साथ लेना चाहिए । इसके साथ ही आपको ये नुस्का लगातार 3 दिन लेना है। किसी किसी को यह केवल एक बार में ही फायदा पंहुचा देता है


बवासीर के मस्सों के लिए तेल :

जब बवासीर के मस्से अधिक हो जाते हैं और इनमे दर्द होने के साथ साथ खून आने लगता है तब ऐसी स्थिति में बवासीर के मस्सों का इलाज करना बहुत ज़रूरी होता है| इसके लिए आज मैं मस्सों के लिए एक तेल बता रहा हूँ जिसे कासीसादि तेल कहते हैं|

मस्सों को नष्ट करने के लिए आचार्य खरनाद के अनुसार- बवासीर के मस्सों पर कासीसादि तेल लगाने से वे मुरझाकर बैठ जाते हैं। बवासीर के मस्सों को नष्ट करने वाला यह अति उत्तम योग है और इससे गुदा को भी कोई हानि नहीं पहुंचती है। रुई के फाहे की मदद से सुबह-शाम तथा रात्रि में सोने से पूर्व दो-तीन माह तक धैर्यपूर्वक इस तेल को मस्सों पर लगाना चाहिए। इससे बवासीर रोग जड़ से समाप्त हो जाता है। लेकिन रोगी को चाहिए कि पेट में कब्ज न होने दे और न ही गरिष्ठ एवं बासी अधिक तला या चटपटा भोजन करे, इस प्रकार के खान-पान से ही कब्ज़ उत्पन्न होता है। 

कासीसादि तेल बनाने में प्रयुक्त होने वाले घटक एवं तेल बनाने की विधि-

कासीस-15 ग्राम 
कनेर की छाल-15 ग्राम 
कलिहारी-15 ग्राम 
असे के पत्ते-15 ग्राम  
बायविडंग-15 ग्राम 
कुठ-15 ग्राम 
सोंठ-15 ग्राम 
दन्तीमूल-15 ग्राम 
सेंधानमक-15 ग्राम 
हरताल-15 ग्राम 
पीपल-15 ग्राम 
काले तिल का तेल - 70 मिली 
मैनसिल-15 ग्राम 
थूहरे को दूध-90 मि.ली. 
कड़वी तोरई के बीज-15 ग्राम 
आक का दूध-90 मिली 
गौमूत्र-03 लीटर 

विधि-

काले तिल का तेल, थूहर का दृध, गौमूत्र और आक का दूध, इन चारों घटकों को छोड़कर, बाकी सभी औषधियों को जल में पीसकर लुग्दी बना लें। | एक बड़ी कढ़ाई लें और उसमें काले तिल का तेल, थूहर का दूध, आक का दूध एवं गौमूत्र डालकर आंच पर चढ़ा दें और उपरोक्त औषधियों की लुग्दी भी इस कढ़ाई में डाल दें। | जब मात्र तेल बच जाए तो कढ़ाई को आंच से उतार लें और ठंडा होने पर किसी शीशी में भर लें। यही कारसादि तेल है जो बवासीर के मस्सों से राहत दिलाता है


बवासीर के मस्सों के लिए मरहम: 


पाइल्स के घरेलु नुस्खों के साथ आपको साथ में मरहम भी लगाना चाहिए जिससे की मस्सो का ज़ख़्म भर जाये और दर्द कम हो. मैं एक मरहम बताने वाला हूँ जिसे लगाने से आपको राहत मिलेगी. 50 ग्राम सफ़ेद वेसिलीन को 6 ग्राम कपूर, 3 गोली सल्फा डायजीन, 6 ग्राम बोरिक एसिड. इन सभी को अच्छी तरह से मिक्स कर ले. इस तरह से मिक्स करे की वेसिलीन और बाकी के आइटम अच्छी तरह से बराबर बराबर मिल जाये. अब इस मरहम को रात को सोने से पहले मल द्वार पर अंदर और बाहर लगाए. साथ ही अंदर मस्सो में भी लगाए. जब सुबह हर काम से फुर्सत हो जाये तो एक बार सुबह भी लगा सकते हैं.

ऊपर दिया गया घरेलु नुस्खा आपकी पाइल्स की बीमारी को डोर करेगा. साथ ही मरहम आपको रहत देगी. इन दोनों नुस्खों का प्रयोग करे. अगर आप इनके अल्वा भी कोई नुस्खा उसे करना चाहते हैं तो मैं कुछ और भी बता देता हूँ.


बवासीर के लिए परहेज:

सावधानी एवं खाने-पान बवासीर रोग की उत्पत्ति खान-पान की लापरवाही से होती है। अतः रोगी को सबसे पहले परहेज और खान-पान पर ध्यान देना चाहिए। सबसे पहले तो इस बात से सजग रहना चाहिए. आयुर्वेद के चिकित्सा ग्रंथों के अनुसार बवासीर रोग की उत्पत्ति के और भी बहुत से कारण बताए गए हैं। इनमें प्रमुख हैं-


  • बाजारी भोजन न करे
  • चाय-काफी का ग्रीष्मऋतु में भी अधिक सेवन।
  • अधिक तीखा चटपटा खाना न खाए
  • अधिक तेल का सेवन न करे
  • आम न खाए
  • बर्गर , चाउमीन न खाए
  • मैदे से बनी हुई चीजे कम खाए
  • रोजाना दोपहर में मट्ठे का सेवन करे
  • काले चने खाए
  • छिलके वाली दाले खाए
  • आटा को बिना छाने रोटी बनाये
  • अधिक फाइबर की चीजों' का सेवन करे


ये भी पढ़े:


आज के इस लेख में आपने पुरानी से पुरानी बवासीर का इलाज Bawasir Ka Ilaj  करना सीखा इसके साथ ही आपने ये भी जाना की बवासीर क्या होता है इसके लक्षण क्या हैं, बवासीर के लिए मरहम, बवासीर के लिए तेल, बवासीर में क्या खाए क्या न खाए यानि की परहेज.

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This post have 3 comments

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Jyoti saxena delete Thursday, March 02, 2017

Mughe Bahar Vali bavasir hi BHT Dard hi or Kigali Bhi fusiyo me Dard hi ye Kase hata sakte hi

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Mahendra Vaja delete Tuesday, July 11, 2017

Sir muje bhi bawasir hi to Jim karthu to kya nonvag kha salute hi

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Homeo Veda delete Monday, July 17, 2017

Beemari door karne ke liye parhej zaroori hota hai. Jitna jyada parhej utni jaldi beemari me labh milta hai.

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